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हिंदुस्तान जिंक ने लगाए 8.55 लाख से अधिक पौधे, पर्यावरण संरक्षण में नई मिसाल

 

 

 

 

जैव विविधता संरक्षण, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली और देशी प्रजातियों के संवर्धन की दिशा में बड़ा कदम

 

प्रकृति संरक्षण जिम्मेदार खनन का अभिन्न हिस्सा है, हरित भविष्य के लिए प्रतिबद्ध है हिंदुस्तान जिंक: अरुण मिश्रा

 

 भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक उत्पादक कंपनी और विश्व की शीर्ष 10 चांदी उत्पादक कंपनियों में शामिल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड ने वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक 8.55 लाख से अधिक पौधरोपण किया है। यह उपलब्धि कंपनी की जैव विविधता संरक्षण, पर्यावरण पुनर्स्थापन और जलवायु संरक्षण के प्रति मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाती है। वैज्ञानिक वनीकरण, प्राकृतिक आवासों की बहाली और जैव विविधता प्रबंधन कार्यक्रमों के माध्यम से हिंदुस्तान जिंक राजस्थान और उत्तराखंड में अपने परिचालन क्षेत्रों में पर्यावरणीय संतुलन को मजबूत करने के लिए लगातार कार्यरत है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान ही कंपनी ने 1,13,500 से अधिक पौधे लगाए है। यह कंपनी के वर्ष 2030 तक जैव विविधता हानि को रोकने और प्राकृतिक संसाधनों, वनस्पतियों तथा पारिस्थितिक तंत्र की गुणवत्ता एवं मजबूती बढ़ाने के दीर्घकालिक लक्ष्य का हिस्सा है। इस अवसर पर हिंदुस्तान जिंक के सीईओ अरुण मिश्रा ने कहा कि, जिम्मेदार खनन केवल बेहतर संचालन तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति के संरक्षण और आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ पर्यावरण तैयार करने से भी जुड़ा है। हमारा हर प्रकृति संरक्षण अभियान औद्योगिक विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के बीच संतुलन बनाने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। वैज्ञानिक तरीकों, नवाचार और साझेदारी के माध्यम से हम ऐसा सकारात्मक पर्यावरणीय प्रभाव पैदा करना चाहते हैं, जिससे प्रकृति और उद्योग दोनों साथ-साथ आगे बढ़ सकें। हिंदुस्तान जिंक ने अपने विभिन्न परिचालन क्षेत्रों में स्थानीय पर्यावरणीय जरूरतों के अनुरूप कई महत्वपूर्ण पहलें शुरू की हैं। राजस्थान स्थित चंदेरिया लेड-जिंक स्मेल्टर में कंपनी ने माइकोराइजा तकनीक की मदद से 22.25 हेक्टेयर जारोफिक्स यार्ड का पुनर्स्थापन किया है और आगे 250 हेक्टेयर क्षेत्र में प्राकृतिक वन विकास का लक्ष्य रखा है। ग्रीन जावर पहल के तहत जावर माइंस समूह ने रावा गांव में व्यापक वृक्षारोपण अभियान चलाया है, जिससे स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ी है और क्षेत्र की जैव विविधता को भी मजबूती मिली है। कंपनी ने राजपुरा दरीबा, चंदेरिया, देबारी और कायड़ में मियावाकी तकनीक को अपनाया है। इस तकनीक से सघन और तेजी से विकसित होने वाले देशी वन तैयार किए जा रहे हैं, जो जैव विविधता बढ़ाने और कार्बन अवशोषण में मददगार हैं। इसके अलावा, रामपुरा आगुचा माइंस में देशी पौधों के संरक्षण और भविष्य के वृक्षारोपण कार्यक्रमों के लिए पौध तैयार करने हेतु विशेष नर्सरी विकसित की गई है। जैव विविधता संरक्षण को और मजबूत करने के लिए हिंदुस्तान जिंक ने इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर के सहयोग से अपने बायोडायवर्सिटी मैनेजमेंट प्लान को विकसित और अद्यतन किया है। कंपनी का लक्ष्य नो नेट लॉस ऑफ बायोडायवर्सिटी हासिल करना है, अर्थात् विकास गतिविधियों के बावजूद जैव विविधता में कुल मिलाकर कोई नुकसान न हो।   

 

 

 

 

 

 

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