भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जन-जन की अगाध आस्था के प्रमुख केंद्र, नौगावां स्थित श्री सांवरिया सेठ मंदिर परिसर में इस समय पैर रखने तक की जगह नहीं है। चारों तरफ सिर्फ हाथी घोड़ा पालकी, जय कन्हैया लाल की के गगनभेदी जयकारे गूंज रहे हैं। पुरुषोत्तम मास (अधिक मास) महोत्सव के तहत आज यहां साक्षात् नाथद्वारा और ब्रज जैसा अलौकिक नजारा जीवंत हो उठा है, जहां संपूर्ण भीलवाड़ा सहित आसपास के जिलों से आए हजारों श्रद्धालुओं की आंखें ठाकुरजी के इस दिव्य रूप को निहार कर सजल हो उठी हैं। सुबह की पहली किरण के साथ ही मंदिर परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार गूंजने लगे थे, जहां सबसे पहले पूरी वैदिक रीति-रिवाज से गौ-माता का विधि-विधान से पूजन किया गया। इसके तुरंत बाद सांवरिया सेठ का दूध, दही, घी, शहद, बूरा और पवित्र गंगाजल से भव्य पंचामृत अभिषेक शुरू हुआ। जैसे-जैसे शंख और घड़ियाल बज रहे थे, भक्तों का उत्साह चरम पर पहुंच रहा था। अभिषेक के बाद जब ठाकुर जी का पर्दा खुला, तो पंडाल में मौजूद हर श्रद्धालु भावविभोर हो गया। आज सांवरिया सेठ को हूबहू नाथद्वारा के श्रीनाथ जी की तर्ज पर जरी-कढ़ाई से सुसज्जित अत्यंत सुंदर और आकर्षक पोशाक धारण कराई गई है, जिसका अलौकिक और मनमोहक रूप देखते ही बनता है। धार्मिक अनुष्ठानों के अगले चरण में विद्वान पंडितों द्वारा मूल भागवत पाठ का वाचन किया गया, जिसमें कृष्ण की बाल लीलाओं और अधिक मास के महत्व को सुनकर भक्त भाव-विभोर हो गए। पाठ की पूर्णाहुति पर विश्व शांति और क्षेत्र की खुशहाली की कामना के साथ भव्य हवन कुंड का आयोजन हुआ, जिसमें मुख्य अतिथियों और ट्रस्टियों ने आहुतियां दीं और फिर भव्य महाआरती उतारी गई। शाम को वो मुख्य आकर्षण का क्षण आया जिसका सबको बेसब्री से इंतजार थाकृअन्नकूट लूट महोत्सवश्। मंदिर परिसर के बीचों-बीच विशाल थाल (पारंपरिक भाषा में शोले) सजाए गए, जिनमें अन्नकूट और सफेद चावल के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे थे। दूसरी तरफ पारंपरिक भारतीय वेशभूषा और एक जैसी थीम ड्रेस (पोशाक) में सजे-धजे सांवरिया सेठ के ग्वाले और गोपियां पूरी तैयारी के साथ मुस्तैद खड़े थे। जैसे ही भगवान को भोग लगाकर अन्नकूट लूट की घोषणा हुई, पूरा परिसर अद्भूत ऊर्जा से भर गया। ग्वाले पूरे उत्साह और उमंग के साथ इन श्शोलेश् (थालों) पर टूट पड़े। चावल और सब्जी को प्रसाद स्वरूप लूटने का यह दृश्य इतना जीवंत था कि उपस्थित हर शख्स को द्वापर युग की ब्रज लीला की याद आ गई। प्रसाद लूटने का यह नजारा वाकई अद्भूत और रोंगटे खड़े कर देने वाला था। इस अनूठी परंपरा के बाद, सभी ग्वालों और गोपियों ने पूरी श्रद्धा के साथ कतार में बैठे हजारों भक्तों को अन्नकूट का महाप्रसाद वितरित करना शुरू किया। इस दौरान विख्यात गायक सुरेश काबरा के भजनों पर पंडाल में झूमते भक्तों को देखा जा सकता था। मंदिर की दान पेटी को खोला गया, जिसमें से 2,54,000 रुपए की राशि प्राप्त हुई है। इसके साथ ही घोषणा की गई है कि आगामी रविवार को मंदिर में गायों के लिए विशेष छप्पन भोग का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस पूरे महोत्सव के मुख्य यजमान भंवरलाल दरगड, बुद्धि बाई एवं उनका परिवार रहा, जबकि यज्ञ के यजमान के रूप में मुकेश पलोड ने अपनी भूमिका निभाई। पूरे प्रसाद निर्माण व वितरण की कमान मुख्य ग्वाले सूरज सिंह के नेतृत्व में संभाली गई, जिनकी 32 जनों की टीम ने 100 किलो चवला चावल, 250 किलो सब्जी और तरबूज का महाप्रसाद तैयार कर श्रद्धालुओं में वितरित किया। इस भव्य और सफल आयोजन में श्री सांवरिया सेठ मंदिर ट्रस्ट के संरक्षक दामोदर अग्रवाल, अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी, मनीष बहेडिया, मदन लाल धाकड़, सोहन लाल गहलोत, चंद्रप्रकाश आगाल, घनश्याम डाड, राजेंद्र बिरला सहित पंडित दीपक आनंद पाराशर और पंडित प्रकाश शर्मा का सराहनीय एवं विशेष सहयोग रहा।


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