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संगीत प्रेमी मित्र समूह ने मनाया प्रथम स्थापना वर्ष, संगीत संगोष्ठी का हुआ भव्य आयोजन

लोक संगीत की सुरमयी प्रस्तुतियों ने बांधा समां, कलाकारों और संगीत प्रेमियों ने साझा किए अनुभव


आत्मा की शांति और समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है संगीत : अजय मूंदड़ा

 

 

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल) संगीत प्रेमी मित्र समूह के प्रथम स्थापना वर्ष के उपलक्ष्य में आयोजित 52वीं संगीत संगोष्ठी का भव्य आयोजन उत्साह और उमंग के साथ संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों, कलाकारों, साहित्यकारों एवं गणमान्य नागरिकों की उल्लेखनीय उपस्थिति रही। पूरे आयोजन के दौरान सुर, ताल और संगीत की मधुर स्वर लहरियों ने ऐसा समां बांधा कि उपस्थित श्रोता मंत्रमुग्ध हो उठे। संगीत प्रेमी मित्र समूह के अरुण संतोष मुछाल ने बताया कि गत वर्ष 20 अप्रैल 2025 को मात्र छह संगीत प्रेमियों के साथ प्रारंभ हुआ यह समूह आज पैंतीस से अधिक सदस्यों के परिवार के रूप में विकसित हो चुका है। यह संगीत गोष्ठी प्रत्येक रविवार शाम 4 से 7 बजे आयोजित की जाती है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल थे। विशिष्ट अतिथियों में लक्ष्मी नारायण डाड, बाबूलाल जाजू, राजेंद्र गोखरू, राष्ट्रीय कवि राजेंद्र गोपाल व्यास, सूर्यप्रकाश नाथानी, महावीर चौधरी सहित अनेक गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। समूह की ओर से अजय मूंदड़ा ने स्वागत उद्बोधन देते हुए समूह की गतिविधियों की जानकारी दी। मूंदड़ा ने कहा की संगीत केवल मनोरंजन का माध्यम नहीं, बल्कि आत्मा की शांति और समाज को जोड़ने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संगीत परंपरा को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। कार्यक्रम में डॉ. आलोक मित्तल, सूरज सक्सेना, रतन खोईवाल, नरेंद्र नुवाल, कृष्णा लढा, वंदना सोमानी, हंसा श्याम बिरला, कृष्ण गोपाल मूंदड़ा, मुकेश कुमावत, भूपेंद्र सिंह, शिशिर माथुर, अजय सोमानी, सुरेश नथरानी, भगवान दरगड़, हितेंद्र सोमानी, राजकुमार टांक, अजय मूंदड़ा, पुरुषोत्तम नथरानी, केजी मूंदड़ा आदि ने गीत प्रस्तुत किए। हार्दिक मूंदड़ा ने सिंथेसाइज़र पर मधुर धुनों से कार्यक्रम को संगीतमय बनाए रखा तथा त्रिलोक छाबड़ा ने भी गीत प्रस्तुत किया। वर्षभर की सक्रियता के आधार पर सुनीता मिश्रा, भगवान दरगड़, सूरज सक्सेना, डॉ. आलोक मित्तल एवं रतन खोईवाल को विभिन्न सम्मान प्रदान किए गए। मुख्य अतिथि सांसद दामोदर अग्रवाल ने समूह की सराहना करते हुए इसे भीलवाड़ा की सांस्कृतिक पहचान को नई दिशा देने वाला प्रयास बताया। अंत में श्रीमती रेखा कोठारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया। कार्यक्रम का संचालन विनोद सोमानी ने शायराना अंदाज में किया। आयोजन स्थल पर देर शाम तक संगीत की स्वर लहरियां गूंजती रही और श्रोताओं ने हर प्रस्तुति पर तालियों से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।                    

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