शरद पूर्णिमा पर श्रीदेवी-भूदेवी की उत्सव मूर्तियों के दर्शन कर भावविभोर हुए श्रद्धालु, शहरवासियों ने जगह-जगह किया पदयात्रियों का स्वागत
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। कहीं गूंजते ‘गोविंदा....गोविंदा’ के जयकारे, कहीं भगवान के दर्शन की आतुरता और कहीं पदयात्रियों के स्वागत में जुटे शहरवासी। शरद पूर्णिमा पर भीलवाड़ा में भगवान तिरुपति बालाजी की भव्य पदयात्रा ने आस्था, सेवा और सामाजिक एकता का अनूठा दृश्य साकार किया। तिरुपति सेवा समिति एवं तिरुपति पदयात्री संघ के तत्वावधान में निकली पदयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए। भगवान श्री तिरुपति वेंकटेश बालाजी के साथ श्रीदेवी एवं भूदेवी की उत्सव मूर्तियों की उपस्थिति ने आयोजन की भव्यता बढ़ाई। पूरे मार्ग में जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा और जगह-जगह शहरवासियों ने पदयात्रियों का आत्मीय स्वागत किया। पदयात्रा का शुभारंभ बालाजी मार्केट स्थित पेच के बालाजी मंदिर से हुआ। यहां से श्रद्धालु निर्धारित मार्ग से होते हुए लक्ष्मीपुरा स्थित तिरुपति बालाजी मंदिर पहुंचे। पदयात्रा के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह देखने को मिला। श्रद्धालु भगवान के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर आयोजित इस धार्मिक यात्रा में भक्ति और उल्लास का अनूठा संगम देखने को मिला। तिरुपति सेवा समिति एवं तिरुपति पदयात्री संघ से जुड़े सुरेश तोषनीवाल ने बताया कि इस वर्ष पदयात्रा की विशेषता भगवान श्री तिरुपति वेंकटेश बालाजी के साथ श्रीदेवी एवं भूदेवी की उत्सव मूर्तियों का सम्मिलित होना रहा। माता पद्मावती एवं माता लक्ष्मी के स्वरूपों के दर्शन कर श्रद्धालु भावविभोर हो उठे। भक्तों ने भगवान के दर्शन कर सुख-समृद्धि और परिवार की खुशहाली की कामना की। पदयात्रा ने शहर में धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक ऊर्जा का विशेष वातावरण निर्मित किया। पदयात्रा के दौरान शहरवासियों और धर्मप्रेमियों ने सेवा-सत्कार की मिसाल पेश की। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए व्यवस्थाएं की गईं। शहरवासियों ने पदयात्रियों को रोककर आत्मीयता के साथ नाश्ता, प्रसाद और अन्य खाद्य सामग्री वितरित की। सेवा में जुटे लोगों का उत्साह भी देखते ही बना। जगह-जगह हुई इन व्यवस्थाओं से पदयात्रियों को राहत मिली और पूरे मार्ग में सेवा, सहयोग एवं भक्ति का माहौल बना रहा। पदयात्रियों के प्रति शहरवासियों का यह स्नेह आयोजन का विशेष आकर्षण रहा। श्रद्धालुओं के स्वागत और सेवा में धर्मप्रेमियों ने बढ़-चढ़कर भाग लिया। तिरुपति सेवा समिति एवं तिरुपति पदयात्री संघ ने पदयात्रियों की सेवा करने वाले सभी शहरवासियों, भक्तों और सहयोगकर्ताओं का हृदय से आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि भगवान बालाजी के प्रति श्रद्धा के साथ सेवा की यह भावना भीलवाड़ा की धार्मिक परंपरा, सामाजिक सद्भाव और आपसी एकता को दर्शाती है। पदयात्रा एवं धार्मिक आयोजन में मंदिर समिति के सदस्य महेश पुरी, सुरेश तोषनीवाल, मुकेश गुर्जर, राधेश्याम तोषनीवाल, अनिल बांगड़, सुशील तंबोली, प्रवीण अग्रवाल और अशोक जोशी सहित समिति से जुड़े अन्य सदस्यों का विशेष योगदान रहा। इनके साथ सुशील डांगी, संजय डाड, पंकज मालानी, मुकेश शारदा, सुनील मानसिंगका, प्रियंक भदादा, रामावतार रांदर, प्रकाश डालमिया और नीरव राठी सहित अनेक सदस्य, गणमान्यजन एवं श्रद्धालु मौजूद रहे। मंदिर समिति की महिला सदस्यों ने भी आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विनीता तोषनीवाल, अनीता गुर्जर, तारा बांगड़, लीला गोस्वामी एवं रीना डाड ने भगवान के रथ के श्रृंगार और आयोजन की व्यवस्थाओं में विशेष सहयोग किया। सभी सदस्यों ने सामूहिक सहभागिता के साथ आयोजन को सफल बनाने में योगदान दिया। श्रद्धालुओं ने भगवान तिरुपति बालाजी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। शरद पूर्णिमा पर निकली भगवान तिरुपति बालाजी की यह पदयात्रा धार्मिक आस्था के साथ सेवा, संस्कार, सद्भाव और सामाजिक एकता का संदेश देने वाली बनी। भगवान के जयकारों से गूंजता मार्ग, श्रद्धालुओं की सामूहिक सहभागिता और शहरवासियों का आत्मीय स्वागत आयोजन की यादगार तस्वीर बनकर उभरा। तिरुपति सेवा समिति एवं तिरुपति पदयात्री संघ के इस आयोजन ने एक बार फिर भगवान बालाजी के प्रति श्रद्धालुओं की अटूट आस्था और भीलवाड़ा की सेवा भावना को प्रदर्शित किया।




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