न्यूनतम वेतन 42 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग, भीलवाड़ा से 100 श्रमिकों को दिल्ली ले जाने का लक्ष्य
संघर्ष के बिना अधिकार हासिल नहीं किए जा सकते: प्रदेश अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। श्रमिकों के अधिकारों, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी और श्रम कानूनों में बदलाव के मुद्दों को लेकर भारतीय ट्रेड यूनियन केंद्र (सीटू) के जिला सम्मेलन में केंद्र व राज्य सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज बुलंद की गई। संत कंवर राम धर्मशाला में आयोजित सम्मेलन में श्रमिक नेताओं ने एकजुट होकर अपने अधिकारों की लड़ाई लड़ने का आह्वान किया। श्रमिक नेताओं ने सरकार की नीतियों के खिलाफ हुंकार भरते हुए 42 हजार रुपए मासिक न्यूनतम वेतन की मांग उठाई। साथ ही, 1 से 3 दिसंबर तक दिल्ली के रामलीला मैदान में होने वाले विरोध प्रदर्शन के लिए भीलवाड़ा से 100 श्रमिकों को ले जाने का लक्ष्य तय कर श्रमिक एकजुटता का संदेश दिया। सम्मेलन की अध्यक्षता साथी आरके स्वामी ने की। उन्होंने कहा कि संगठन की एकता बनाए रखने और श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा के लिए संगठित रहना जरूरी है। शोषण के खिलाफ आवाज बुलंद करना वर्तमान समय की महत्वपूर्ण लड़ाई है। सम्मेलन में राजीविका राजस्थान की महामंत्री कैलाश कंवर, मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव जिला सचिव कुलदीप सिंह, प्रदेश प्रतिनिधि रामेश्वर लाल जाट, टेक्सटाइल श्रमिक यूनियन अध्यक्ष सोनू शर्मा तथा संत कंवर राम ट्रस्ट के सचिव ईश्वर आसनानी विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में मौजूद रहे। सीटू के प्रदेश अध्यक्ष भंवर सिंह शेखावत ने कहा कि संघर्ष के बिना अधिकार हासिल नहीं किए जा सकते। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, न्यूनतम वेतन और श्रम कानूनों से जुड़े मुद्दे उठाते हुए आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियों से श्रमिकों और आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने सरकारी स्कूलों के बंद होने, शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में निजीकरण को बढ़ावा मिलने तथा श्रमिकों के हितों से जुड़े कानूनों में बदलाव पर चिंता जताई। शेखावत ने कहा कि श्रमिकों के हितों की रक्षा के लिए बनाए गए 29 श्रम कानूनों की जगह चार श्रम संहिताएं लागू किए जाने से श्रमिकों के अधिकार प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने न्यूनतम वेतन बढ़ाकर 42 हजार रुपए प्रतिमाह करने की मांग करते हुए कहा कि मौजूदा महंगाई में कम वेतन पर परिवार का भरण-पोषण करना मुश्किल है। उन्होंने हड़ताल के अधिकार, ठेका श्रमिकों के शोषण और निर्माण श्रमिकों की योजनाओं से जुड़े मुद्दे भी उठाए। सम्मेलन में श्रमिक नेताओं ने आरोप लगाया कि केंद्र और राज्य सरकारों की नीतियां पूंजीपतियों के पक्ष में हैं तथा श्रमिकों के हितों की अनदेखी की जा रही है। इन मुद्दों को लेकर 1 से 3 दिसंबर तक दिल्ली के रामलीला मैदान में बड़े विरोध प्रदर्शन की तैयारी की जा रही है। भीलवाड़ा से 100 श्रमिक साथियों को इसमें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया, जिस पर सम्मेलन में उपस्थित सदस्यों ने सहमति जताई। सम्मेलन के दौरान राजीविका, बुनकर, मिड-डे मील तथा अन्य श्रमिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों की भागीदारी रही। मिड-डे मील श्रमिक यूनियन के चुनाव में विमला देवी को अध्यक्ष और मोदी देवी को महामंत्री चुना गया। टेक्सटाइल क्षेत्र से गणेश गहलोत, संपत शर्मा, सद्दाम हुसैन, करण सिंह, रामनिवास, बबलू सिंह, अनार सिंह, जोरा बानो, विमला देवी बिश्नोई, भंवरी देवी बिश्नोई, सुरेंद्र बिश्नोई, सुनील और बाबूलाल सहित बड़ी संख्या में श्रमिक सम्मेलन में शामिल हुए। राजीविका से अनीता कंवर, सत्तू बुनकर, टीना कंवर, सरिता, शमीम बानो और हेमलता गर्ग सहित अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे। सम्मेलन का संचालन सीटू के प्रदेश सचिव ओमप्रकाश देवानी ने किया। सम्मेलन में श्रमिकों की एकजुटता मजबूत करने और अधिकारों के लिए आंदोलन तेज करने पर जोर दिया गया।




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