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राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण, ‘शक्ति शंखनाद’ से गूंजा भीलवाड़ा, दिया राष्ट्रसेवा का संदेश

 

 

तीन साल की बालिकाओं से बुजुर्ग सेविकाओं तक ने की कदमताल, 1100 सेविकाओं ने किया पथ संचलन

 

 

विजयादशमी पर भीलवाड़ा विभाग के चार क्षेत्रों की सेविकाओं ने लिया भाग, सामाजिक संगठनों ने पुष्पवर्षा कर किया स्वागत

 

 भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। कदमों में अनुशासन, मन में राष्ट्रभक्ति और संकल्प में नारीशक्ति का सामर्थ्य। विजयादशमी के पावन अवसर पर भीलवाड़ा की सड़कों पर नारीशक्ति, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अनूठा संगम नजर आया। राष्ट्र सेविका समिति के 90 वर्ष पूर्ण होने पर निकले ‘शक्ति शंखनाद पथ संचलन’ में 1100 सेविकाओं ने कदम से कदम मिलाकर संगठन की शक्ति और राष्ट्र निर्माण के संकल्प का उद्घोष किया। तीन वर्ष की बालिकाओं से लेकर 70 वर्ष की वरिष्ठ सेविकाओं तक की सहभागिता ने संदेश दिया कि संस्कारों से सशक्त नारी ही समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण की मजबूत आधारशिला है। भीलवाड़ा विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में भीलवाड़ा महानगर, भीलवाड़ा ग्रामीण, जहाजपुर और आसींद क्षेत्र की सेविकाओं ने भाग लिया। कार्यक्रम का शुभारंभ विभाग कार्यवाहिका मनीषा जाजू की प्रस्तावना से हुआ। मुख्य अतिथि अरुणा गारू ने आयोजन की सराहना करते हुए राष्ट्र सेविका समिति के कार्यों और सेविकाओं के समर्पण की प्रशंसा की। इस अवसर पर प्रांत बौद्धिक प्रमुख सुशीला पारीक एवं प्रांत तरुणी प्रमुख कीर्ति सोलंकी की गरिमामयी उपस्थिति रही। मंचासीन अतिथियों ने शस्त्र-शास्त्र पूजन किया। प्रांत सह बौद्धिक प्रमुख सुशीला लढ़ा ने बौद्धिक उद्बोधन में समिति की 90 वर्षों की यात्रा को नारीशक्ति के जागरण, संस्कार निर्माण और सामाजिक परिवर्तन की दिशा में महत्त्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र सेविका समिति राष्ट्रसेवा, सामाजिक जागरूकता और भारतीय संस्कृति के संरक्षण के लिए निरंतर कार्य कर रही है। साधना, संस्कार और सकारात्मक प्रभाव के माध्यम से समाज में परिवर्तन लाना समिति का प्रमुख उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि नारी की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय जीवन में भी उसकी महत्त्वपूर्ण भागीदारी है। परिवार, कार्यक्षेत्र और समाज में अपने दायित्वों का निर्वहन करते हुए नारी राष्ट्र निर्माण में प्रभावी योगदान दे सकती है। सेवाभाव, निरंतरता और दायित्वबोध के माध्यम से समिति इसी भावना को मजबूत कर रही है। सुशीला लढ़ा ने रानी लक्ष्मीबाई, जीजाबाई और अहिल्याबाई होलकर के आदर्शों का उल्लेख करते हुए भारतीय नारी के साहस, त्याग, नेतृत्व और सांस्कृतिक मूल्यों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी सम्मान, संस्कार और सामर्थ्य का विशेष स्थान है तथा उसकी सक्रिय सहभागिता से समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव है। राजेंद्र मार्ग विद्यालय से विजयादशमी उत्सव और शस्त्र-शास्त्र पूजन के बाद पथ संचलन प्रारंभ हुआ। गणवेश में अनुशासित पंक्तियों में कदमताल करती सेविकाओं ने संगठन की एकजुटता, आत्मविश्वास और राष्ट्रसमर्पण का परिचय दिया। पूरे आयोजन में राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना प्रमुख रही। पथ संचलन मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों और संस्थाओं ने सेविकाओं का उत्साहपूर्वक स्वागत किया। लघु उद्योग भारती, सहकार भारती, आरोग्य भारती, भारत विकास परिषद, वनवासी कल्याण परिषद, विद्या भारती, आदर्श विद्या मंदिर, दुर्गा शक्ति अखाड़ा, मुस्कान फाउंडेशन और श्री महावीर युवक मंडल सेवा संस्थान सहित अन्य संगठनों ने पुष्पवर्षा कर अभिनंदन किया। शहर के विभिन्न स्थानों पर नागरिकों ने भी संचलन का स्वागत किया। सामाजिक संगठनों की सहभागिता ने आयोजन के प्रति समाज के सम्मान और सहयोग को प्रदर्शित किया। ‘90 वर्ष की अखंड साधना, प्रभाव से परिवर्तन की ओर’ के संकल्प के साथ आयोजित यह पथ संचलन नारीशक्ति के सुदृढ़ीकरण, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और सांस्कृतिक गौरव का संदेश देकर संपन्न हुआ। अंत में विभाग सह कार्यवाहिका सुशीला जाट ने आभार व्यक्त किया।   
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