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नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ की पूर्णाहुति के साथ प्रज्ञा पुराण कथा का हुआ समापन


लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में श्रद्धालुओं ने लिया भाग, गायत्री साधना और सद्विचारों को जीवन में अपनाने का संदेश

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।
यज्ञ कुंडों से उठती आहुतियों की सुगंध, वातावरण में गूंजते वैदिक मंत्र और प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की प्रेरणा। आस्था, अध्यात्म और संस्कारों के इस संगम के बीच लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित नौ कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञा पुराण कथा का सोमवार को पूर्णाहुति के साथ समापन हुआ। आयोजन के अंतिम दिन श्रद्धालुओं ने यज्ञ में आहुतियां अर्पित कर सुख-समृद्धि, शांति और विश्व कल्याण की कामना की। वहीं, संगीतमय प्रज्ञा पुराण कथा ने धर्म के साथ जीवन में सदाचार, नैतिकता और सकारात्मक विचारों को अपनाने का संदेश दिया। आयोजक कैलाश चन्द्र, सीए अंकित, पुलकित लखोटिया ने बताया की कार्यक्रम के तहत सुबह 7.30 बजे से 10.30 बजे तक गायत्री महायज्ञ, संस्कार एवं पूर्णाहुति के अनुष्ठान हुए। यज्ञ में वैदिक मंत्रों के साथ आहुतियां अर्पित कर सुख-समृद्धि, शांति और जनकल्याण की कामना की गई। यज्ञ के दौरान श्रद्धालुओं ने धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेकर आध्यात्मिक वातावरण का अनुभव किया। दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संगीतमय प्रज्ञा पुराण कथा का आयोजन हुआ। कथा के माध्यम से धर्म, नैतिकता, आत्मचिंतन और जीवन में अच्छे विचारों को अपनाने की प्रेरणा दी गई। कथा व्यास ने अपने प्रवचनों में आध्यात्मिक साधना के साथ सदाचार और संस्कारों को जीवन का अभिन्न अंग बनाने का संदेश दिया। आयोजन के दौरान गायत्री महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भारतीय संस्कृति, धार्मिक परंपराओं और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़ने का अवसर मिला। पूर्णाहुति के साथ धार्मिक आयोजन का समापन हुआ। इस दौरान उप महापौर राधेश्याम सोमानी, नगर अध्यक्ष केदार जागेटिया, नगर मंत्री सुरेश बिरला, शकरगढ़ सरपंच सतीश मंत्री सहित कई समाज तन व गनमान्य नागरिक मौजूद रहे। लखोटिया परिवार की ओर से आयोजित इस धार्मिक कार्यक्रम में गायत्री महायज्ञ और प्रज्ञा पुराण कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक चिंतन का अवसर मिला। कार्यक्रम का मूल संदेश यही रहा कि धार्मिक अनुष्ठानों की सार्थकता तभी है, जब उनसे प्राप्त प्रेरणा को व्यवहार में उतारकर जीवन को संस्कारित बनाया जाए।
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