मृत्युभोज में मिठाई और रात्रिकालीन विवाह पर पूर्ण प्रतिबंध, सगाई-शादी के खर्चों में भारी कटौती; नियम तोड़ने वालों पर होगी सामाजिक और कानूनी कार्रवाई
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जिले की माण्डल तहसील स्थित ग्राम पंचायत चांदरास में रविवार को जोगी समाज के पांच गांवों की एक महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक बैठक आयोजित की गई। बैठक में समाज के पंचों, प्रबुद्ध नागरिकों और पांचों गांवों के प्रतिनिधियों ने एकजुट होकर समाज में व्याप्त फिजूलखर्ची, कुरीतियों और सामाजिक बुराइयों को समाप्त करने के उद्देश्य से कई बड़े और कठोर निर्णय लिए। इन फैसलों को समाज सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। बैठक में लादूवास, चांदरास, जोगरास, कापड़िया और फतहपुरा गांवों के बड़ी संख्या में समाजजन, पंच एवं वरिष्ठ नागरिक उपस्थित रहे। बैठक की अध्यक्षता समाज के पांच पटेलों ने की। इस दौरान सर्वसम्मति से नौ महत्वपूर्ण नियम लागू करने का निर्णय लिया गया, जिनका पालन पूरे समाज के लिए अनिवार्य रहेगा। घुमन्तु जिला सहसंयोजक भंवर नाथ ने बताया कि समाज में बढ़ती फिजूलखर्ची और सामाजिक बुराइयों को रोकने के लिए लंबे समय से इस प्रकार के निर्णय की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। सभी समाजजनों की सहमति से इन नियमों को तत्काल प्रभाव से लागू करने का निर्णय लिया गया है। बैठक में लिए गए निर्णयों मे समाज में सगाई की रस्म पर पहले लिए जाने वाले 20 से 25 हजार रुपये के खर्च को अब सीमित कर रू. 5,000 तय किया गया है, लड़के वालों की तरफ से शादी व्यवहार व रीति-रिवाज के नाम पर होने वाले रू. 40,000 के खर्च को कम करके अब मात्र रू. 10,000 तय किया गया है, पडला प्रथा के तहत होने वाले खर्च को भी सीमित करते हुए रू. 5,000 की जगह अब रू 2,000 निर्धारित किया गया है, यदि कोई सगा-संबंधी रिश्ता तय करने के बाद उसे बिना किसी जायज कारण के तोड़ता है, तो पांच पटेलों की समझाइश और अनुसंधान के बाद दोषी पक्ष पर रू. 40,000 का जुर्माना लगाया जाएगा, जो प्रार्थी को देय होगा, यदि कोई व्यक्ति किसी विवाहित महिला को भगाकर ले जाता है और एक महीने की समय सीमा के भीतर उसे वापस परिवार या पति को सौंपता है, तो उस पर सवा लाख रुपए (रू. 1,25,000) जुर्माना लगेगा। यदि वह महिला को नहीं सौंपता और अपने घर रखता है, तो ढाई लाख रुपए (रू. 2,50,000) का भारी जुर्माना देना होगा, समाज में अब रात के समय होने वाली शादियों पर पूरी तरह रोक रहेगी। सभी मांगलिक कार्यक्रम व फेरे दोपहर या सूर्यास्त से पहले संपन्न करने होंगे और बारात को भी समय रहते अपने निवास स्थान पर लौटना होगा, मृत्युभोज में फिजूलखर्ची रोकने के लिए मिठाई बनाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। अब पुराने रीति-रिवाजों के अनुसार केवल दाल, पुरी और लपसी ही बनाई जा सकेगी, शादी-व्याह, मांगलिक या आध्यात्मिक कार्यक्रमों में यदि कोई व्यक्ति शराब पीकर हुड़दंग करता है या काम बिगाड़ने की कोशिश करता है, तो उस पर रू. 1,200 का जुर्माना लगाया जाएगा और उसे समाज के सामने हाथ जोड़कर माफी मांगनी होगी, समाज में किसी भी प्रकार का लड़ाई-झगड़ा होने पर सबसे पहले समाज के पांच पटेलों को सूचित करना अनिवार्य होगा। पंचों के स्तर पर समाधान न होने की स्थिति में ही पुलिस में जाया जा सकेगा शामिल है। बैठक में गोरधन नाथ, जिलाध्यक्ष घुमन्तु लादू नाथ, सेणु नाथ, रतन नाथ, श्रवण नाथ भोपाजी, मदन नाथ, मोहन नाथ, सुवानाथ, बापू नाथ, पूरण नाथ, भैरूनाथ, गजु नाथ सहित पांचों गांवों के अनेक पंच, समाजसेवी और प्रबुद्ध नागरिक उपस्थित रहे। समाज के पंचों ने स्पष्ट किया कि इन नियमों का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ समाज स्तर पर कठोर कार्रवाई की जाएगी और आवश्यकता पड़ने पर कानूनी कदम भी उठाए जाएंगे। जोगी समाज द्वारा लिए गए इन निर्णयों को क्षेत्र में सामाजिक सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।


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