2017 से अब तक शिक्षा पर 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश, प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक ग्रामीण और आदिवासी बच्चे हो रहे लाभान्वित
भीलवाड़ा। (पंकज पोरवाल) विश्व की सबसे बड़ी एकीकृत जिंक और शीर्ष चांदी उत्पादक कंपनी हिन्दुस्तान जिंक लिमिटेड को 30वें भामाशाह सम्मान समारोह में 6 इकाईयों को सम्मानित किया गया। भामाशाह पुरस्कार हिन्दुस्तान जिंक के रामपुरा आगुचा माइन, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर, जावर माइन्स, राजपुरा दरीबा कॉम्प्लेक्स, जिंक स्मेल्टर देबारी एवं कायड माइन को को शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक योगदान के लिए शिक्षा विभूषण प्रदान किया गया। यह लगातार 11वां वर्ष है जब राजस्थान सरकार ने परिवर्तनकारी शैक्षिक पहलों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए हिंदुस्तान जिंक को सम्मानित किया है। कंपनी ने 2017 से विभिन्न शिक्षा हस्तक्षेपों में 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिससे सालाना 2 लाख से अधिक बच्चे लाभान्वित हो रहे हैं। यह पुरस्कार बिडला आडिटोरियम सभागार में आयोजित पुरस्कार समारोह में उपमुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा के मुख्य आतिथ्य में आयोजित हुआ। समारोह में उप मुख्यमंत्री प्रेमचंद बैरवा एवं शिक्षा मंत्री मदन दिलावर, अतिरिक्त शिक्षा सचिव राजेश यादव ने राज्यभर से चयनित 145 भामाशाहों एवं 99 प्रेरकों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर राजस्थान के मिड डे मिल आयुक्त विश्व मोहन शर्मा, समसा की राज्य परियोजना निदेशक डॉ रश्मि शर्मा, शिक्षा निदेशक सीता राम जाट, संयुक्त निदेशक महेन्द्र खींची भी मौजूद थे। जिसे हिन्दुस्तान जिंक की इकाइयों रामपुरा आगुचा माइन के आइबीयू सीईओ राममुरारी, चंदेरिया लेड जिंक स्मेल्टर के पर्यावरण प्रमुख मनीषा भाटी, हेड एचआर ममता शर्मा, देबारी जिंक स्मेल्टर के एसबीयू निदेशक विवेक यादव, हेड सीएसआर रूचिका चावला, दरीबा स्मेल्टिंग कॉम्प्लेक्स के हेड सीएसआर अभय गौतम, जावर माइंस के वित्त प्रमुख अमित मालानी, कायड माइंस के हेड राजेश चौधरी एवं सीएसआर टीम ने प्राप्त किया। विगत 9 वर्षों में, हिन्दुस्तान जिं़क ने शिक्षा के क्षेत्र में सीएसआर के तहत् सामाजिक विकास में 551 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश किया है, जिसमें बुनियादी ढांचे के उन्नयन पर 83 करोड़ रुपये जिनमें कक्षा कक्षों का निर्माण, शौचालय, खेल के मैदान, पीने के पानी की सुविधाएं और विद्युतीकरण और दीर्घकालिक शिक्षा प्रयासों हेतु 468 करोड़ रुपये शामिल हैं। इनमें नंद घर जो कि आधुनिक आंगनवाड़ी केंद्रों में प्रारंभिक बचपन की देखभाल शामिल है, शिक्षा संबल, ग्रामीण छात्रों वशेष आवश्यकता वाले बच्चों के लिए समावेशी शिक्षा जीवन तरंग,उच्च शिक्षा हेतु ऊंची उड़ान, ग्रामीण बलिकाओं के लिए उच्च शिक्षा को बढ़ावा देना और कंपनी-संचालित स्कूलों के लिए सहयोग शामिल हैं। हिन्दुुस्तान जिंक के शिक्षा कार्यक्रम से प्रतिवर्ष 2 लाख से अधिक बच्चें लाभान्वित हो रहे हैं, जिसका स्कूल नामांकन, विशेष रूप से किशोर बालिकओं के विद्यालय से जुड़ाव, आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में सीखने के परिणामों पर उल्लेखनीय प्रभाव हुआ है। राज्य में कक्षा 10वीं का उत्तीर्ण प्रतिशत 2007 में 47 प्रतिशत से बढ़कर 2026 में 92.53 प्रतिशत हो गया है, जिसमें बालिकाएं लगातार बालकों का से बेहतर प्रदर्शन रहा हैं। जहां पिछले 10 वर्षों में राजस्थान का औसत परिणाम लगभग 67.66 प्रतिशत रहा, वहीं शिक्षा संबल से जुड़े 37 स्कूलों ने 100 प्रतिशत परिणाम हासिल किया है। हिंदुस्तान जिंक का शिक्षा संबल कार्यक्रम ग्रामीण राजस्थान में वंचित बच्चों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच में सुधार के लिए और अधिक प्रयास करते हुए, कंपनी ने राजस्थान सरकार के शिक्षा विभाग के साथ एमओयू पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें अगले पांच वर्षों में प्रदेश में शैक्षिक विकास को बढ़ावा देने के लिए 36 करोड़ रुपये का निवेश होगा। हिंदुस्तान जिंक के प्रयासों में शिक्षा के साथ ही ग्रामीण महिलाओं और किसानों का उत्थान, स्वास्थ्य सेवा, जल संरक्षण को बढ़ावा देकर, स्वच्छता, बुनियादी ढांचे में सुधार और स्थायी आजीविका के लिए भी कार्यक्रम संचालित किये जा रहे है। इन पहलों ने सामूहिक रूप से 4 हजार से अधिक गांवों में 26 लाख से अधिक लोगों के जीवन को सकारात्मक रूप से प्रभावित किया है।


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