दयाराम मेठानी ने ‘‘याद ये दुनिया करे ऐसी निशानी छोड़ जा, जोश भर दे जो सभी में वो कहानी छोड़ जा’’, सुनाकर बटोरी तालियां
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जिला साहित्यकार परिषद् भीलवाड़ा की अप्रेल माह की काव्य गोष्ठी सिन्धुनगर स्थित हेमू कालाणी सिन्धी शिक्षण संस्था परिसर में संपन्न हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता दयाराम मेठानी ने की एवं संचालन महेन्द्र शर्मा ने किया। गोष्ठी में मां, बेटी, आखा तीज, बाल विवाह, परशुराम जयंती एवं अन्य विभिन्न विषयों पर गीत ग़ज़ल की सशक्त रचनायें प्रस्तुत की गई। गोष्ठी का आरंभ सरस्वती वंदना से हुआ। गोष्ठी में सर्व प्रथम जयप्रकाश खोईवाल ने अपनी रचना प्रस्तुत करते हुए कहा ‘‘एक मां चार बेटों को प्यार से पालती है, आज चार बेटों से एक मां पाली नहीं जाती है’’, बृज सुंदर सोनी ने ‘‘परी सी बेटियों का मुस्कुराना छूट जाता है, सब कुछ वही रहता है मायका छूट जाता है’’, ओम उज्जवल ने बाल विवाह पर राजस्थानी में कविता प्रस्तुत की- ‘‘मूं तो थी काची कोंपल मनै बेगी क्यों परणाई’’, श्याम सुंदर मधुप ने परशुराम जयंती पर उनकी जीवनी से जुड़े तथ्य दोहों में सुनाएं’’, शिखा बाहेती ने ‘‘द्वार खड़ी मैं तेरे कब से भर नैनों में नीर’’, दिव्या ओबेराय ने ‘‘भारत का जन-जन जागृत है विश्व शांति फिर लायेगा’’, गोपाल शर्मा ने ‘‘जिंदगी के फलसफे अब समझ आने लगे है’’, बंसीलाल पारस ने ‘‘मत पूछो कैसे गुजरी मेरी तमाम उम्र’’, डॉ. अवधेश जौहरी ने ‘‘कुर्सी के लिए देश के नेता हैं लहूलुहान’’, दिनेश दीवाना ने ‘‘शाम ढलती रही याद आती रही, मैं तुम्हारे लिए दर्द सहती रही’’, अजीज जख्मी ने ‘‘मैं सीने में तूफान दबाए फिरता हूँ, सर पे आकाश उठाए फिरता हूँ’’, महेंद्र शर्मा ने ‘‘एक तरफ आतंक का अहंकार है तो दूसरी तरफ अहंकार से भरा झूठों का सरदार है’’, दयाराम मेठानी ने ‘‘याद ये दुनिया करे ऐसी निशानी छोड़ जा, जोश भर दे जो सभी में वो कहानी छोड़ जा’’, सुनाकर तालियां बटोरी। काव्य गोष्ठी में देवीलाल दुलारा, नरेन्द्र वर्मा एवं राजेन्द्र पोरवाल ने अपनी सशक्त रचनाओं से श्रोताओं का मन मोह लिया।

Social Plugin