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सांवलिया सेठ मंदिर में 30 को सजेगी नृसिंह लीला, हिरण्यकश्यप वध का होगा मंचन


बाइक और खुली जीप में निकलेगा हिरण्यकश्यप, प्रहलाद की भक्ति से गूंजेगा नौगांव का मंदिर

 

 भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल) धर्मनगरी भीलवाड़ा के आस्था के केंद्र नौगांवा स्थित सांवरिया सेठ मंदिर में आगामी दिनों में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिलेगा। मंदिर प्रबंधन और भक्तों द्वारा आयोजित होने वाले कार्यक्रमों की श्रृंखला में 30 अप्रैल को नृसिंह जयंती के अवसर पर बुराई पर अच्छाई की जीत का जीवंत मंचन किया जाएगा। नौगांवा स्थित सांवरिया सेठ मंदिर में नृसिंह लीला का आयोजन किया जाएगा। पिछले 8 वर्षों से अनवरत जारी इस परंपरा में इस बार कुछ नयापन जोड़ा गया है। मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष गोविंद प्रसाद सोडाणी ने बताया कि इस बार नृसिंह लीला के पात्रों के लिए विशेष पोशाकें मध्य प्रदेश के इंदौर से मंगवाई गई हैं। कार्यक्रम के मुख्य आकर्षण में हिरण्यकश्यप का वध और भक्त प्रहलाद की रक्षा का सजीव चित्रण होगा। धार्मिक उत्सव को आधुनिक और व्यापक बनाने के लिए इस बार विशेष प्रयोग किया जा रहा है। सोडाणी ने बताया कि दो युवकों को हिरण्यकश्यप का रूप धराया जाएगा। इनमें से एक को खुली जीप में पुराने शहर की गलियों और विभिन्न कॉलोनियों में भ्रमण कराया जाएगा, जबकि दूसरा युवक बाइक से ग्रामीण क्षेत्रों में पहुंचेगा। इस अनूठी पहल का उद्देश्य शहर के साथ-साथ ग्रामीण परिवेश के लोगों को भी इस जीवंत लीला से जोड़ना है। सजीव मंचन के लिए पात्रों का चयन कर लिया गया है। प्रदीप पाराशर भगवान नृसिंह का रौद्र रूप धारण करेंगे, जबकि प्रिंस पाराशर भक्त प्रहलाद के किरदार में नजर आएंगे। वहीं, असुर राज हिरण्यकश्यप की चुनौतीपूर्ण भूमिका उदयलाल कुमावत और मोनू माली निभाएंगे। वैशाख शुक्ल चौदस के दिन होने वाले इस आयोजन में मंदिर प्रांगण में एक विशाल खंभा बनाया जाएगा। संध्या वेला में भगवान नृसिंह इसी खंभे को फाड़कर प्रकट होंगे और हिरण्यकश्यप का संहार करेंगे। इस रोमांचक और भक्तिमय दृश्य के बाद भव्य महाआरती की जाएगी और श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण होगा। समस्त आयोजन भक्त मंडल और मंदिर ट्रस्ट के तत्वावधान में संपन्न होगा। मंदिर परिसर को रंग-बिरंगी रोशनी और फूलों से सजाया जा रहा है, जिससे पूरा वातावरण वैकुंठ धाम के समान प्रतीत हो रहा है। भक्तों में इस दिव्य महोत्सव को लेकर भारी उत्साह देखा जा रहा है। श्रद्धालु अपनी सुविधा के अनुसार दर्शन समय का ध्यान रखें और उत्सव के दौरान अनुशासन बनाए रखें। कार्यक्रम का संयोजक अमन शर्मा, श्रवण सेन और मुकेश सोनी को बनाया गया है।                   

 

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