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सत्संग का दर्पण जीवन में उतरते ही अज्ञान का अंधकार मिट जाता है: संत शांतिलाल


संत निरंकारी मंडल, भीलवाड़ा द्वारा नेहरू विहार में विशाल संत समागम का आयोजन

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। संत निरंकारी मंडल, भीलवाड़ा द्वारा नेहरू विहार में एक विशाल संत समागम का आयोजन किया गया। इस समागम में बाड़मेर से पधारे जोनल इंचार्ज ब्रह्मज्ञानी संत शांतिलाल (राजू) ने सैकड़ों श्रद्धालु भक्तों को संबोधित किया। अपने प्रवचन में संत ने कहा कि आज के युग में इंसान का ध्यान धन-दौलत और बाहरी दिखावे की ओर अधिक हो गया है, जबकि आध्यात्मिक ज्ञान से वह दूर होता जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान समय के सद्गुरु, संत निरंकारी मिशन के माध्यम से परमपिता परमात्मा के साक्षात दर्शन करवाकर मानव को आत्मिक ज्ञान प्रदान कर रहे हैं, जिससे उसका जीवन कल्याणमय बन रहा है। उन्होंने कहा कि निराकार परमात्मा हमसे दूर नहीं है। परमात्मा का अस्तित्व आत्मा से जुड़ा है। आत्मा है तो परमात्मा का अनुभव है, और आत्मा का ज्ञान नहीं तो परमात्मा भी दूर प्रतीत होता है। समय-समय पर सद्गुरु, पीर-पैगंबर मानव को जगाकर उसे परमात्मा से मिलाते रहे हैं, लेकिन आज मनुष्य मोह-माया में फंसकर अपने वास्तविक स्वरूप को भूल बैठा है। संत ने आगे कहा कि यह शरीर केवल एक साधन है, हम शरीर नहीं बल्कि आत्मा हैं। आत्मा अजर-अमर है, जबकि यह शरीर पाँच तत्वों का बना हुआ है और अंततः उन्हीं में विलीन हो जाएगा। इसलिए आवश्यक है कि मनुष्य समय रहते सद्गुरु की शरण लेकर अपने असली स्वरूप को पहचाने और अहंकार का त्याग करे। उन्होंने कहा कि जब मानव अपने मूल स्वरूप को पहचान लेता है, तब उसे जीवन का सच्चा उद्देश्य समझ में आता है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है। वर्तमान समय में सद्गुरु माता सुदीक्षा महाराज द्वारा ब्रह्मज्ञान देकर मानव जीवन का उद्धार किया जा रहा है। जब मनुष्य अपने असल रूप को पहचान लेता है, तब उसे चारों ओर “तू ही तू” का ही अनुभव होता है। संत ने बताया कि सत्संग का दर्पण जीवन में उतरते ही अज्ञान का अंधकार मिट जाता है और सच्चे मार्ग का ज्ञान प्राप्त होता है। परमात्मा से मिलन होने पर तन, मन और धन सब उसी को समर्पित हो जाता है, और जिनके जीवन में “राम” का वास हो जाता है, वही सच्चे अर्थों में सुखी होते हैं। समागम में पधारे संत का स्थानीय मुखी इंचार्ज संत ग्यारसीलाल द्वारा दुपट्टा एवं मेवाड़ी पगड़ी पहनाकर स्वागत किया गया। अंत में उपस्थित सभी भक्तों का आभार व्यक्त किया गया। मीडिया सहायक लादूलाल ने जानकारी देते हुए बताया कि इस समागम में भीलवाड़ा सहित चित्तौड़गढ़, गुलाबपुरा, आसींद, मांडलगढ़, जहाजपुर, शाहपुरा, गंगापुर आदि क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। समागम के दौरान गीत, कविता और विचारों के माध्यम से भक्तों ने आत्ममंथन प्रस्तुत किया, जिससे वातावरण पूरी तरह आध्यात्मिक भाव से ओत-प्रोत हो गया।


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