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मानवता के सिपाही विक्रम दाधीच ने किया 112वां रक्तदान

 

 

रक्तदान सबसे बड़ा महादान”, युवाओं से की आगे आकर जीवन बचाने की अपील

 

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल) समाज सेवा और मानवता के क्षेत्र में लगातार सक्रिय रहने वाले समाजसेवी विक्रम दाधीच (62 वर्ष) ने नौतपा की भीषण गर्मी के बीच अपना 112वां रक्तदान कर एक बार फिर सेवा और समर्पण की मिसाल पेश की। उनके इस सराहनीय कार्य से जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी। इस अवसर पर उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से रक्तदान करने की अपील करते हुए कहा कि रक्तदान से बड़ा कोई दान नहीं है, क्योंकि इससे किसी जरूरतमंद व्यक्ति को नया जीवन मिलता है। विक्रम दाधीच ने बताया कि रक्तदान पूरी तरह सुरक्षित प्रक्रिया है और स्वस्थ व्यक्ति हर तीन महीने में रक्तदान कर सकता है। उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को सोशल मीडिया तक सीमित रहकर सामाजिक सरोकारों से भी जुड़ना चाहिए। रक्तदान के माध्यम से कई लोगों की जिंदगी बचाई जा सकती है। विक्रम दाधीच पिछले लगभग 40 वर्षों से नियमित रूप से रक्तदान कर रहे हैं। इसके साथ ही वे रक्तदान के प्रति जनजागरण अभियान भी निरंतर चला रहे हैं। विभिन्न सामाजिक एवं धार्मिक संस्थाओं के माध्यम से उन्होंने देशभर में रक्तदान के प्रति लोगों को जागरूक करने का कार्य किया है। उनके प्रयासों से हजारों जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध हो सका है। रक्तदान शिविर में मौजूद लोगों ने विक्रम दाधीच के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए उन्हें मानवता का सच्चा सिपाहीबताया। दाधीच ने बताया कि उन्हें इस पुनीत सेवा कार्य की प्रेरणा त्यागमूर्ति महर्षि दधीचि तथा अपने माता-पिता से मिली है। उन्हीं के आशीर्वाद एवं प्रेरणा से वे वर्षों से मानव सेवा के इस अभियान से जुड़े हुए हैं। उन्होंने युवाओं से अधिक से अधिक संख्या में रक्तदान करने का आह्वान करते हुए कहा कि रक्तदान महादान है और इससे कई लोगों को नया जीवन मिल सकता है। इस अवसर पर महंत आशुतोष शर्मा, समाजसेवी डी.के. दाधीच, ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. दीपक गोयल, डॉ. प्रतिभा शेखावत, जनसंपर्क अधिकारी अर्पित बाहेती एवं मनोज प्रजापत सहित कई गणमान्यजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कहा कि विक्रम दाधीच का यह 112वां रक्तदान समाज के लिए प्रेरणादायक है और इससे युवाओं में सेवा भावना को बढ़ावा मिलेगा।   
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