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भाविप विवेकानंद शाखा का अनूठा ग्रीष्म कालीन अभिरुचि शिविर, विशेष बच्चों के चेहरों पर बिखरी मुस्कान

 

 

कबाड़ से जुगाड़ः वेस्ट मटीरियल को दे रहे नया रूप, कोई सीख रहा कंप्यूटर, तो कोई पहली बार थिरका संगीत की धुन पर

 

भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल) समाज में जब प्रतिभाओं को सही मंच और स्नेह मिलता है, तो उनकी क्षमताएं निखर कर सामने आती हैं। कुछ ऐसा ही नजारा इन दिनों भारत विकास परिषद विवेकानंद शाखा द्वारा आयोजित ग्रीष्मकालीन अभिरुचि शिविर में देखने को मिल रहा है। शाखा अध्यक्ष गिरीश अग्रवाल की माने तो यह शिविर आम बच्चों के लिए नहीं, बल्कि समाज के उन विशेष बच्चों (बौद्धिक दिव्यांग एवं दृष्टिहीन) के लिए लगाया गया है, जिनके हौसलों को पंख देने की जरूरत थी। शिविर में बच्चे सिर्फ नई विधाएं सीख रहे हैं, बल्कि खुलकर अपनी जिंदगी का आनंद ले रहे हैं। सचिव केजी सोनी के मुताबिक शिविर में शामिल 36 बौद्धिक दिव्यांग बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने और उनकी रचनात्मकता को निखारने के लिए विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इन बच्चों को नृत्य, सिलाई, जिमनास्टिक और संगीत के साथ-साथ आर्ट एंड क्राफ्ट गिफ्ट पैकिंग की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। बच्चे वेस्ट कांच की बोतलों और आइसक्रीम की खाली डिब्बियों को रंगों कलाकृतियों से सजाकर खूबसूरत पेन स्टैंड और पोट (गमले) बना रहे हैं। उनकी इस जादुई कला को देखकर हर कोई हैरान है। दूसरी ओर, शिविर में आए 8 दृष्टिहीन बच्चों के लिए यह अनुभव बेहद चमत्कारी साबित हो रहा है। इन्हें विशेष रूप से तैयार किए गए लूडो और सांप-सीढ़ी के जरिए इन खेलों को खेलना सिखाया जा रहा है। इतना ही नहीं, आधुनिक तकनीक से कदमताल मिलाने के लिए इन बच्चों को मोबाइल और कंप्यूटर चलाने का विशेष प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि वे भविष्य में आत्मनिर्भर बन सकें। शिविर में आए दृष्टिहीन बच्चों के उत्साह का ठिकाना नहीं है। बच्चों ने बताया कि उन्होंने जिंदगी में पहली बार संगीत की धुन पर थिरकना (नृत्य करना) सीखा है, जो उन्हें बेहद पसंद रहा है। सांप-सीढ़ी और लूडो खेलकर उनकी खुशियां दोगुनी हो गई हैं। शिविर के माहौल से बच्चे इस कदर जुड़ चुके हैं कि अब उन्हें इसके खत्म होने का डर सताने लगा है। मासूमियत से अपने मन के भाव व्यक्त करते हुए बच्चों ने कहा  यहां रोज आना और नई चीजें सीखना हमें बहुत अच्छा लग रहा है। जब यह शिविर खत्म हो जाएगा, तो हम घर पर क्या करेंगे? हमें यहीं रहना है। बच्चों के चेहरों की यह अनमोल मुस्कान ही इस शिविर की सबसे बड़ी सफलता बयां कर रही है। शिविर का समापन 24 मई को शांति अतिथि गृह में शाम को 6 बजे होगा।                      

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