रंग गुलाल की मस्ती में सड़कों पर रंग खेलने निकली युवाओं की टोलियां, कहीं डीजे पर डांस तो कहीं कलरफुल पानी की बौछार
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। वस्त्रनगरी भीलवाड़ा शहर में शीतला अष्टमी का पर्व बुधवार को श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया गया। शीतला माता की पूजा-अर्चना के बाद शहर के मंदिरों और पूजा स्थलों पर होली खेलने का क्रम शुरू हो गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाएँ अपने परिवार और माता की पूजा-अर्चना के बाद मंदिरों में पहुंचीं और पारिवारिक सुख-शांति की कामना की। वहीं दूसरी ओर बुधवार सुबह से ही शहर में रंगोत्सव का उत्साह नजर आने लगा। होली के आठ दिन बाद आने वाले इस पर्व को लेकर लोगों में आज सुबह से उत्साह का माहौल है। बड़ी संख्या में शहरवासी शहर की सड़कों पर एक दूसरे को रंग और गुलाल लगाकर शीतला अष्टमी पर्व की बधाई दे रहे हैं। शहर के अनेक मोहल्ला और चौराहों पर युवाओं की भीड़ टोलियां बनाकर एक दूसरे को रंगने के लिए सुबह से ही निकल पड़ी है। लोग टोलियों में बँटकर एक-दूसरे पर खूब गुलाल उड़ाते दिखे। इस दौरान शहर के प्रमुख धार्मिक स्थलों पर महिलाओं पितृ-विधान और माता की पूजा-अर्चना कर परिवार की खुशहाली की कामना करती नजर आईं। वहीं बच्चों और युवाओं ने ठंडे व ठंडाई का आनंद लिया। बच्चों के मनोरंजन के लिए विभिन्न खेलों का आयोजन भी किया गया। शहर में होली के दौरान टोलियों का जुलूस निकलता रहा। एक-दूसरे के चेहरे पर रंग और गुलाल लगाने के साथ ही रंगीन पकवान और पारंपरिक व्यंजनों का भी आयोजन किया गया। पुराने भीलवाड़ा में लोग ढोल की थाप पर होली के गीत और शब्दों के व्यंग बाण के साथ गाते बजाते पर्व का आनंद ले रहे हैं। कई प्राइवेट रिसॉर्ट और फार्म हाउस में भी रंग बिरंगी पार्टियों का आयोजन किया गया है। साथ ही युवाओं में आज के दिन को लेकर स्पेशल क्रेज़ देखने को मिल रहा है। युवा रंग बिरंगे बालों वाली टोपी लगाकर और अपने चेहरे को कलर फुल अंदाज में रंग कर निकल रहे हैं। दोपहर तक रंगों की मस्ती चलती रही। इसके बाद शाम के समय लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ठंडे औलिया, विभिन्न प्रकार के पकवान और स्वादिष्ट व्यंजनों का आनंद लिया। घर-घर में मेहमानों का स्वागत किया गया और मिठाइयों के साथ होली की खुशियां बांटी गईं। खास बात यह रही कि पर्व के दौरान किसी प्रकार की असामाजिक गतिविधियों की सूचना नहीं मिली। होली के इस त्यौहार ने न केवल धार्मिक श्रद्धा का संदेश दिया बल्कि शहर में आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक भी बन गया।

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