आज बिरज में होरी रे रसिया...जैसे पारंपरिक फाग गीतों पर भक्ति के आनंद में डूबे भक्त
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। फाल्गुन की मस्ती और राधा-कृष्ण के अटूट प्रेम का संगम गांधीनगर स्थित निंबार्क आश्रम में देखने को मिला। अवसर था भव्य फाग महोत्सव का, जहाँ आस्था का ऐसा सैलाब उमड़ा कि समूचा आश्रम परिसर गोकुल-बरसाना के रंग में रंग गया। इस महोत्सव की खास बात यह रही कि भीलवाड़ा में पहली बार ब्रज की तर्ज पर विविध प्रकार की होली का अनूठा आयोजन किया गया। शुरुआत महंत मोहन शरण महाराज के पावन सानिध्य में हुई। सुप्रसिद्ध भजन गायक पंडित देवराज व्यास ने जब अपनी टीम के साथ भजनों की अमृत वर्षा शुरू की, तो श्रद्धालु खुद को झूमने से नहीं रोक पाए। आज बिरज में होरी रे रसिया...जैसे पारंपरिक फाग गीतों पर भक्त भक्ति के आनंद में डूबे नजर आए। आयोजक दिनेश शर्मा व नीलम शर्मा ने बताया कि इस बार महोत्सव को खास बनाने के लिए कई प्रयोग किए गए। कार्यक्रम के दौरान केवल फूलों की ही नहीं, बल्कि कई अन्य रूपों में होली खेली गई ब्रज की परंपरा को जीवित करते हुए लठमार होली का प्रदर्शन किया गया, जो शहरवासियों के लिए आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। भगवान के विग्रहों के साथ भक्तों ने लड्डू और टॉफियों की होली खेलकर एक-दूसरे का मुंह मीठा कराया। अंत में महकते फूलों और गुलाल के साथ पूरा वातावरण सतरंगी हो उठा। भीलवाड़ा में इस तरह का आयोजन पहली बार हुआ है जहाँ लठमार और लड्डू मार होली का आनंद भक्तों को एक साथ मिला हो। यह गुरुदेव की कृपा और राधा-माधव भक्त परिवार के प्रेम का ही परिणाम है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में धर्मप्रेमियों ने शिरकत की। अंत में आरती के बाद सभी को प्रसाद वितरित किया गया। इस महोत्सव ने न केवल फाल्गुन का स्वागत किया, बल्कि शहर में आपसी भाईचारे और भक्ति की नई ऊर्जा का संचार भी किया।


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