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भीलवाड़ा में छाई गणगौर की रंगत, सोलह श्रृंगार में सजी महिलाओं ने भक्ति से रचाया उत्सव



गीत-भजन, शोभायात्रा और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ हर्षोल्लास से मनाया गया पर्व

  भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)।
भीलवाड़ा शहर सहित जिले में गणगौर पर्व बड़े ही उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया गया। इस अवसर पर महिलाओं ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर सोलह श्रृंगार किया और भगवान शिव व माता गौरी की पूजा-अर्चना की। सुबह से ही मंदिरों और घरों में पूजा का दौर शुरू हो गया। महिलाओं ने समूह में एकत्र होकर गणगौर के पारंपरिक गीत गाए और परिवार की सुख-समृद्धि एवं अखंड सौभाग्य की कामना की। शहर के विभिन्न क्षेत्रों में सजी-धजी महिलाएं सिर पर कलश और गणगौर की प्रतिमाएं लेकर शोभायात्रा में शामिल हुईं, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय और उल्लासपूर्ण बन गया। शहर के शास्त्री नगर क्षेत्र में महिलाओं और कुंवारी कन्याओं ने सामूहिक रूप से गणगौर का पूजन किया. सुबह से ही महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सजी-धजी सोलह सिंगार में नजर आईं और घरों व मंदिरों में पूजा-अर्चना की तैयारियों में जुट गईं. पूजा स्थल को सुंदर तरीके से सजाया गया और ईसर-गणगौर की प्रतिमाओं को स्थापित कर विधि-विधान से पूजा की गई, जिससे पूरे माहौल में भक्ति और उल्लास का रंग घुल गया। नव विवाहिता किरण शर्मा ने बताया कि गणगौर पर्व का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व अत्यंत खास माना जाता है। यह त्योहार भगवान शिव और माता पार्वती के अटूट प्रेम और समर्पण का प्रतीक है, जिन्हें इस दिन ईसर और गणगौर के रूप में पूजा जाता है। इस दौरान युवतियों में भी खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने भी पूरे रीति-रिवाजों के साथ व्रत रखकर अच्छे वर की कामना की। कई स्थानों पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जहां लोक नृत्य और संगीत की प्रस्तुतियों ने लोगों का मन मोह लिया। गणगौर पर्व के समापन पर विधि-विधान से माता गौरी की प्रतिमाओं का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर शहरवासियों ने एक-दूसरे को शुभकामनाएं दीं और इस पारंपरिक त्योहार की खुशियां साझा कीं।