पीओपी मुक्त गणेशोत्सव के लिए 8 वर्षों से लगातार अनूठी पहल, मोलेला की प्राकृतिक मिट्टी से गढ़ी 800 प्रतिमाएं 14 सितंबर को होंगी उपलब्ध
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। गणेशोत्सव केवल पूजा और उत्सव का पर्व नहीं, बल्कि अपनी परंपराओं और प्रकृति से जुड़ने का भी अवसर है। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए आकृति कला संस्थान ने इस बार गणेश चतुर्थी पर प्राकृतिक मिट्टी से बनी गणेश प्रतिमाओं को बढ़ावा देने की पहल की है। संस्थान की ओर से करीब 800 प्रतिमाएं तैयार कराई गई हैं, जिनमें राजस्थान की पारंपरिक मोलेला मिट्टी कला की झलक भी दिखाई देगी। 14 सितंबर को श्रद्धालु वकील कॉलोनी स्थित आकृति आर्ट गैलरी से इन प्रतिमाओं को प्राप्त कर सकेंगे। संस्थान के सचिव कैलाश पालिया ने बताया कि प्रतिमाओं का निर्माण खमनोर क्षेत्र की प्रसिद्ध मोलेला प्राकृतिक मिट्टी से किया गया है। विख्यात लोक कलाकार नारायण लाल कुम्हार ने पारंपरिक कला एवं शिल्प तकनीक से इन प्रतिमाओं को आकार दिया है। श्रद्धालुओं की सुविधा को देखते हुए 6 इंच से लेकर 2 फीट तक के विभिन्न आकारों में प्रतिमाएं तैयार की गई हैं। आकृति कला संस्थान पिछले आठ वर्षों से इको-फ्रेंडली गणेश प्रतिमाओं के जरिए पर्यावरण संरक्षण का संदेश दे रहा है। संस्थान के अनुसार पीओपी से बनी प्रतिमाओं के विसर्जन से जल स्रोतों और जलीय जीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। प्राकृतिक मिट्टी से बनी प्रतिमाएं विसर्जन के बाद पानी में घुलकर प्रकृति में वापस मिल जाती हैं और पर्यावरण पर अपेक्षाकृत कम प्रभाव डालती हैं। इस पहल का उद्देश्य केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित नहीं है। संस्थान राजस्थान की पारंपरिक मोलेला मिट्टी कला और कुम्हार समुदाय के हुनर को सम्मान तथा आर्थिक बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम कर रहा है। आयोजन को सफल बनाने में युवा कलाकार अनु प्रजापत, अनुष्का पाराशर, शांतिलाल गाडरी और उमंग उपाध्याय सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं। श्रद्धालु 14 सितंबर को आकृति आर्ट गैलरी, वकील कॉलोनी से मिट्टी से निर्मित गणेश प्रतिमाएं प्राप्त कर सकते हैं। संस्थान ने शहरवासियों से अपील की है कि ’’मिट्टी से बने गणेश, प्रकृति के संग गणेश उत्सव’’ के संकल्प के साथ पीओपी मुक्त गणेशोत्सव मनाएं और पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी निभाएं।




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