महाश्रमण सभागार में श्रद्धा-भाव से हुआ पर्युषण महापर्व का शुभारंभ, साधक शिविर के साथ रोज होगी आरोग्यम कार्यशाला
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। तेरापंथ नगर स्थित महाश्रमण सभागार मंगलवार को आध्यात्मिक ऊर्जा और श्रद्धाभाव से सराबोर रहा। आचार्यश्री महाश्रमण के सुशिष्य मुनिश्री यशवंत कुमार के सानिध्य में पर्युषण महापर्व का शुभारंभ हुआ। विशाल धर्मसभा में मुनिश्री ने पर्युषण को आत्मावलोकन और आत्मशुद्धि का पर्व बताते हुए कहा कि यह व्यक्ति को बाहरी दुनिया से हटकर अपने भीतर झांकने तथा कषायों को शांत करने की प्रेरणा देता है। कार्यक्रम का शुभारंभ तेरापंथ सभा संस्था के पदाधिकारियों द्वारा मंगलाचरण गीत के संगान से हुआ। धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री यशवंत कुमार ने कहा कि जिस प्रकार ज्योतिष शास्त्र में सप्तर्षि का विशेष महत्व है, उसी प्रकार जैन धर्म में पर्युषण पर्व का भी विशिष्ट स्थान है। यह पर्व स्वयं को देखने, अपनी कमियों का आत्मपरीक्षण करने और जीवन को आध्यात्मिक दिशा देने का अवसर है। मुनि श्री मोक्ष कुमार जी ने कहा कि पर्युषण आत्मनिरीक्षण एवं आत्मपरीक्षण का पर्व है। यह मन में बनी सूक्ष्म गांठों को खोलने और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करता है। सभा अध्यक्ष अशोक सिंघवी ने उपस्थित श्रावक-श्राविकाओं का स्वागत किया। मंत्री सुनील दक ने पर्युषण महापर्व के दौरान आयोजित होने वाले विभिन्न कार्यक्रमों की जानकारी दी। शिविर संयोजक गौतम दुगड़ ने बताया कि पर्युषण पर्व के साथ पर्युपाषणा साधक शिविर का भी शुभारंभ किया गया है। शिविर के दौरान प्रतिदिन दोपहर 2 बजे आरोग्यम कार्यशाला आयोजित होगी। इसमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ स्वास्थ्य से जुड़ी उपयोगी जानकारियां देंगे। शिविर के प्रथम दिन आयोजित आरोग्यम कार्यशाला में सिम्स हॉस्पिटल के नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सुरेश भदादा ने नेत्रों से संबंधित विभिन्न रोगों, उनके कारणों तथा बचाव के उपायों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने आंखों की देखभाल और समय पर जांच के महत्व के बारे में भी बताया। कार्यक्रम में तेरापंथ समाज के बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे।




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