विशेष मास्टर क्लास में 100 से अधिक सीए हुए शामिल, बदलते टैक्स नियमों से लेकर ग्लोबल सीए फर्मों के भविष्य तक हुई अहम चर्चा
भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। टैक्स ऑडिट के बदलते प्रावधानों और बढ़ती पेशेवर जिम्मेदारियों के बीच चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने शुक्रवार को टैक्स ऑडिट की बारीकियों को गहराई से समझा। सीआईआरसी ऑफ आईसीएआई की भीलवाड़ा शाखा द्वारा आयोजित विशेष “टैक्स ऑडिट मास्टरक्लास” में क्लॉज-बाय-क्लॉज प्रैक्टिकल एनालिसिस के साथ क्रिटिकल डिसिप्लिनरी इश्यूज पर मंथन हुआ। देश के विभिन्न शहरों से आए विशेषज्ञों ने सीए सदस्यों को टैक्स ऑडिट की चुनौतियों, रिपोर्टिंग की सावधानियों और बदलते पेशेवर परिदृश्य के लिए तैयार रहने के महत्वपूर्ण गुर बताए। ज्ञान और व्यावहारिक अनुभव से भरपूर इस मास्टरक्लास में सदस्यों को चार स्ट्रक्चर्ड सीपीई घंटे का लाभ मिला। शाखा चेयरमैन सीए दिनेश सुथार ने बताया कि टैक्स ऑडिट से जुड़े प्रावधानों, रिपोर्टिंग आवश्यकताओं और व्यावहारिक स्तर पर आने वाली चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया। उन्होंने कहा कि मास्टरक्लास का उद्देश्य सदस्यों को टैक्स ऑडिट की क्लॉज-बाय-क्लॉज समझ देने के साथ-साथ पेशेवर कार्यों के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक मामलों से भी अवगत कराना है। वाइस चेयरमैन सीए एस.एन. लाठी ने कहा कि वर्तमान समय में टैक्स ऑडिट के क्षेत्र में लगातार बदलाव हो रहे हैं। ऐसे में चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के लिए नवीनतम प्रावधानों और व्यावहारिक पहलुओं की अद्यतन जानकारी रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के ज्ञानवर्धक कार्यक्रम सदस्यों के पेशेवर कौशल को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के प्रथम सत्र में इंदौर से आए सीए पंकज शाह, सीसीएम ने “क्रिटिकल इश्यूज इन टैक्स ऑडिट एंड डिसिप्लिनरी केसेज” विषय पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने टैक्स ऑडिट के दौरान सामने आने वाले महत्वपूर्ण मुद्दों, आवश्यक सावधानियों और अनुशासनात्मक मामलों के विभिन्न पहलुओं पर व्यावहारिक दृष्टिकोण से प्रकाश डाला। द्वितीय सत्र में सीए अपूर्व मेहता, इंदौर ने “टैक्स ऑडिट-क्लॉज बाय क्लॉज-प्रैक्टिकल एनालिसिस” विषय पर विस्तृत चर्चा की। उन्होंने टैक्स ऑडिट के विभिन्न क्लॉज, उनके प्रावधानों, रिपोर्टिंग प्रक्रिया तथा ऑडिट के दौरान ध्यान रखने योग्य महत्वपूर्ण व्यावहारिक पहलुओं को उदाहरणों के माध्यम से समझाया। कार्यक्रम में मुंबई से आए विशेष अतिथि सीए दुर्गेश काबरा, सीसीएम की गरिमामयी उपस्थिति रही। उन्होंने चार्टर्ड अकाउंटेंसी फर्मों के भविष्य और बदलते व्यावसायिक परिदृश्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान प्रतिस्पर्धात्मक दौर में सीए फर्मों को आपसी सहयोग और विलय के माध्यम से बड़ी तथा ग्लोबल स्तर की फर्मों के रूप में विकसित होने की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि फर्मों के विलय से विशेषज्ञता, संसाधनों और सेवाओं का बेहतर समन्वय संभव होगा तथा भारतीय सीए फर्मों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा के नए अवसर मिलेंगे। कार्यक्रम का संचालन शाखा के कोषाध्यक्ष सीए अक्षय सोडानी ने किया। उन्होंने कार्यक्रम की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए वक्ताओं और उपस्थित सदस्यों का स्वागत किया तथा सफल आयोजन में सहयोग देने वाले सभी सदस्यों का आभार व्यक्त किया। सेमिनार में आरसीएम सीए निर्भीक गांधी, सीए आलोक सोमानी, सीए पुनीत मेहता, सीए दिलीप गोयल, सीए जी.पी. सिंघल, सीए नवीन वागरेचा, सीए अतुल सोमानी, सीए के.सी. बाहेती, सीए के.सी. अजमेरा, सीए सतीश सोमानी, सीए अरुण काबरा, सीए अनिल काबरा, सीए एस.पी. झंवर, सीए आनंद ओझा, सीए आर.एल. बिरला, सीए आलोक पलोड़, सीए नवीन कोगटा, सीए नवीन छापरवाल, सीए विनय मंत्री और सीए अमित सेठ सहित 100 से अधिक चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ने भाग लिया। मास्टरक्लास में बड़ी संख्या में सीए सदस्यों ने टैक्स ऑडिट, रिपोर्टिंग आवश्यकताओं और पेशेवर अनुशासन से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अपनी समझ को और मजबूत किया।




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