*मानसिक गुलामी का त्याग कर स्वाभिमानी बने, गौरव करें अपनी संस्कृति ओर विरासत पर-स्वामी गोविन्द देव गिरी*
*लोकप्रियता से नहीं मिलता सम्मान, हमारा आचरण श्रेष्ठ होना जरूरी-जस्टिस माहेश्वरी*
*स्वामी गोविन्द देव गिरी एवं संतों के सानिध्य में श्री प्रभुलाल जगदीशप्रसाद सोमानी माहेश्वरी हॉस्टल का शुभारंभ*
भीलवाड़ा: श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास अयोध्या के कोषाध्यक्ष एवं श्री कृष्ण जन्मभूमि न्यास मथुरा के उपाध्यक्ष विख्यात धर्म गुरू स्वामी गोविन्द देव गिरी के सानिध्य में शुक्रवार सुबह ए.बी.माहेश्वरी एजुकेशनल ट्रस्ट भीलवाड़ा द्वारा नवनिर्मित श्री प्रभुलाल जगदीशप्रसाद सोमानी माहेश्वरी हॉस्टल का शुभारंभ किया गया। भीलवाड़ा में द ग्र्रीन्स कॉलोनी के पास 200 फीट रिंग रोड पर अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के तत्वावधान में ए.बी.माहेश्वरी एजुकेशनल ट्रस्ट भीलवाड़़ा द्वारा नवनिर्मित श्री प्रभुलाल जगदीश प्रसाद सोमानी माहेश्वरी छात्रावास के उद्घाटन समारोह में महामंडलेश्वर अनंतदेव महाराज, हरिशेवाधाम के महामंडलेश्वर हंसारामजी महाराज, पंचमुखी दरबार के महन्त लक्ष्मणदास त्यागी राम धाम महाराज का भी सानिध्य मिला। लोकार्पण समारोह के मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी थे। विशिष्ट अतिथि प्रमुख उद्योगपति व समाजसेवी रामपाल सोनी,अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के सभापति संदीप काबरा, सांसद दामोदर अग्रवाल एवं विधायक अशोक कोठारी रहे। वैदिक मंत्रोच्चार के मध्य फीता खोल कर छात्रावास का लोकार्पण हुआ। इसके बाद संतों, अतिथियों एवं सोमानी परिवार के सदस्यों ने दीप प्रज्वलन कर पूजा अर्चना की। पूजा पंडित कल्याण शर्मा ने सम्पन्न कराई। उद्घाटन के बाद तेरापंथ नगर सभागार में आयोजित समारोह में स्वामी गोविन्ददेव गिरी महाराज ने कहा कि हमे अपनी संस्कृति ओर विरासत पर गौरव करना चाहिए क्योंकि जिसकी स्मृतियां ओर स्वाभिमान नष्ट हो जाता है वहीं गुलाम बनता है। प्राचीन गुरूकुल शिक्षा प्रणाली की जगह लॉर्ड मैकाले की अंग्रेजी शिक्षा प्रणाली ने भारतीयों को मानसिक गुलाम बना दिया क्योंकि अंग्रेज जानते थे कि किसी भी देश को बर्बाद करना हो तो उस देश की शिक्षा प्रद्धति को नष्ट कर दिया जाए। संतोष की बात है कि पिछले कुछ वर्षो से भारत बदल रहा है ओर अब शिक्षा प्रद्धति अकबर को नहीं महाराणा प्रताप को महान बताने लगी है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति का उत्थान ओर सच्ची स्वाधीनता को लाना है तो मानसिक गुलामी से मुक्त होना होगा। उच्च शिक्षित व्यक्ति अपनी परम्पराओं के प्रति स्वाभिमानी बने तभी शिक्षा की सार्थकता है। हमारे बच्चें हमारी परम्पराओं की आलोचना करे तो समझना संस्कारों की कमी है। मासांहार से नई पीढ़ी को बचाने की अपील करते हुए कहा कि शाकाहार ही मानवता का अलंकरण होता है। स्वामी गोविन्ददेव गिरी ने कहा कि अच्छा डॉक्टर, इंजीनियर या सीए बनने से पहले स्वाभिमानी भारतीय बनना जरूरी है। मानवीय मूल्यों पर चलने पर ही हमारा जीवन समाज व राष्ट्र के लिए उपयोगी होगा। मानव को मानव के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए ये सिखाने वाली व्यवस्था ही धर्म होती है। उन्होंने कहा कि शिक्षा डिग्री देने तक सीमित नहीं होकर छात्र का कौशल विकास करने वाली ओर स्वालम्बी बनाने वाली होनी चाहिए। डिग्री लेकर नौकरी पाना ही शिक्षा का लक्ष्य नहीं होना चाहिए। हमारे मन में अपने पूर्वजों के कार्य एवं व्यवसाय के प्रति हीन भावना नहीं होकर स्वाभिमान के भाव होने चाहिए। युवाओं के कौशल विकास के बिना विधर्मियों से अपने समाज को नहीं बचा पाएंगे। स्वामी गोविन्ददेव गिरी ने छात्रावास निर्माण करने वाले सोमानी परिवार को साधुवाद अर्पित करते हुए कहा कि जीवन में अर्थ की सार्थकता तभी है जब उसका उपयोग दूसरों की जिंदगी संवारने में भी हो सके। छात्रावास के माध्यम से छात्रों को अध्ययन के लिए बेहतर सुविधायुक्त माहौल देने के साथ भारतीय संस्कृति ओर मूल्यों से जोड़ने की पहल भी करनी होगी। समारोह में मुख्य अतिथि सर्वोच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एवं भारतीय विधि आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति दिनेश माहेश्वरी ने कहा कि माहेश्वरी समाज आर्थिक पूंजी से अधिक सामाजिक पूंजी बनाने में विश्वास करता है। छात्रावास निर्माण की पहल इसी सामाजिक पूंजी की मिसाल है। प्रतिभावान जरूरतमंद छात्रों की आवास सम्बन्धी समस्याओं के निराकरण में ऐसी पहल बहुत जरूरी है। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज के लोग अपने कार्य व सेवा से प्रतिष्ठा प्राप्त करते है। राष्ट्र निर्माण एवं विकास में समाज को सक्रिय भागीदारी निभानी है। समाज की निरन्तर प्रगति के लिए जरूरी है कि उंचाई पर उड़ते समय पंख के साथ जड़ से भी जुड़े रहे। हम अपने कौशल से लोकप्रिय हो सकते लेकिन हर लोकप्रियता सम्मान प्राप्त नहीं कर सकती उसके लिए आचरण श्रेष्ठ होना जरूरी है। जीवन में आगे बढ़ने के लिए अहंकार का त्याग जरूरी है। हरिशेवाधाम के महामंडलेश्वर हंसाराम महाराज ने सनातन एकता की अपील करते हुए कहा कि जातिवाद, पंथवाद ओर समाजवाद इस एकता की भावना को कमजोर करता है। समाज के कमजोर वर्ग को आगे बढ़ाने पर ही सनातन धर्म मजबूत होगा। सनातन संस्कृति मजबूत होने पर ही भारत हिंदू राष्ट्र बन सकेगा। विशिष्ट अतिथि प्रमुख उद्योगपति व समाजसेवी रामपाल सोनी एवं अखिल भारतीय माहेश्वरी महासभा के सभापति संदीप काबरा ने भी छात्रावास निर्माण के लिए सोमानी परिवार को साधुवाद अर्पित करते हुए कहा कि इस तरह के कार्य से प्रतिभावान जरूरतमंद छात्रों को शहर में उच्च अध्ययन व कोचिंग के लिए बेहतर आवासीय सुविधा प्राप्त हो सकेगी। उन्होंने कहा कि समाज की प्रतिभाओं का भारतीय ओर राज्य प्रशासनिक सेवाओं में अधिकाधिक चयन हो इसके लिए निरन्तर प्रयास करने होंगे ओर ऐसे छात्रावास में इन परीक्षाओं के लिए तैयारी करने वालों के लिए विशेष स्थान तय होना चाहिए। स्वागत उद्बोधन देते हुए सोमानी परिवार के नवनीत सोमानी ने बताया कि 104 छात्रों की आवास की क्षमता वाले करीब 15 करोड़ की लागत से निर्मिमत छह मंजिला छात्रावास में सर्वसुविधायुक्त ए.सी. कक्ष, भोजन कक्ष, कैफेटेरिया, कम्प्यूटर लैब, 100 छात्रों की क्षमता वाला हॉल, सीसीटीवी कैमरा, दो लिफ्ट आदि की व्यवस्था उपलब्ध रहेगी। उन्होंने बताया कि छात्रावास संचालन का मुख्य उद्देश्य भीलवाड़ा में उच्च अध्ययन एवं प्रोफेशनल कोर्सेज की कोचिंग व प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए आने वाले समाज के सभी वर्गो के प्रतिभावान छात्रों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण के साथ सर्वसुविधायुक्त आवास सुविधा उपलब्ध कराना है। छात्रावास छात्रों को शिक्षा, संस्कार एवं व्यक्तिव विकास के क्षेत्र में नई उंचाईयां प्राप्त करने के लिए अनुकूल माहौल प्रदान करेंगा। कार्यक्रम मीडिया प्रभारी महावीर समदानी ने बताया किविशिष्ट अतिथि के रूप में विधायक अशोक कोठारी, समाजसेवी लादूलाल बांगड़, श्रीगोपाल राठी एवं शांतिलाल पानगड़िया में मंचासीन रहे। उद्बोधन के प्रारंभ में स्वामी गोविन्ददेव गिरी ने मंचासीन अतिथियों के साथ छात्रावास निर्माण की अनुकरणीय पहल के लिए जगदीशप्रसाद सोमानी एवं नवनीत सोमानी का स्वागत अभिनंदन किया। अतिथियों ने जगदीशप्रसाद सोमानी के जीवन पर आधारित स्मारिका का विमोचन भी किया। अतिथियों का स्वागत ए.बी.माहेश्वरी एजुकेशनल ट्रस्ट भीलवाड़ा के जगदीशप्रसाद सोमानी, श्यामसुंदर सोमानी, नवनीत सोमानी, श्लोक सोमानी आदि ने किया। आभार ट्रस्ट के श्यामसुंदर सोमानी ने जताया। संचालन जगदीशप्रसाद कोगटा ने किया। भीलवाड़ा के प्रमुख उद्योगपति,समाजसेवी,जनप्रतिनिधि, अधिकारी, पत्रकार सहित समाज के विभिन्न वर्गो से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद थे।
*संख्या घटती जाएगी तो बच नहीं पाएंगे*
समारोह में उद्बोधन के दौरान स्वामी गोविन्ददेव गिरी ने हिन्दू धर्मावलम्बियों की घटती संख्या पर चिन्ता जाहिर करते हुए कहा कि यदि हमे अपना अस्तित्व कायम रखना है तो प्रत्येक हिन्दू परिवार में चार संतान का लक्ष्य रखना होगा। हम दो हमारे दो से हम दो हमारे एक या नहीं हो तो कोई बात नहीं जैसी बाते बुद्धिभ्रष्टता है। समाज को जागरूक होना पड़ेगा ओर सोचना पड़ेगा कि हम अपनी संख्या को घटा कर कहां ले जाना चाहते है। चिंतन नहीं किया तो सामाजिक डेमोग्राफी बदल जाएगी। समाज व संस्कृति की रक्षा करनी है तो संख्या बल होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि माहेश्वरी समाज की कुछ वर्षो पहले 16 लाख आबादी थी जो अब घटकर करीब 9 लाख रह गई है। समाज को चिंतन करना होगा कि आबादी इसी तरह घटती रही तो भविष्य क्या होगा ओर कैसे अपनी विरासत को सुरक्षित रख पाएंगे। इस अवसर पर रमेश चंद्र ,ललित ,राजेश सोमानी, श्यामसुंदर राघव सोमानी, डॉ शिवरतन डॉ शशांक सोमानी ,ओमप्रकाश बद्री प्रसाद सोमानी, सत्यनारायण नुवाल, श्यामलाल मुंन्दडा, मोहनलाल छापरवाल कैलाश चंद्र बाहेती नरेश माहेश्वरी ,साकेत अग्रवाल तेरापंथ सभा के पदाधिकारी गण ,बाबूलाल जाजू ,गोविंद सोडानी, संदीप झवर, अशोक कालानी व शिक्षा समिति कपासन ट्रस्टी ,आईसीएआइ इकाई भीलवाड़ा शाखापदाधिकारी आदि ने स्वागत सत्कार किया


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