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1913 का मानगढ़...बलिदान को इतिहास के पन्नों से निकाल राष्ट्रीय स्मृति में लाने की पहल



भीलवाड़ा में जुटे वनवासी कल्याण आश्रम ने केंद्र से राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने का प्रस्ताव किया पारित, पाठ्य-पुस्तकों में भी बलिदान गाथा शामिल करने पर जोर

 भीलवाड़ा (पंकज पोरवाल)। जलियांवाला बाग से छह साल पहले मानगढ़ की पहाड़ियों पर अंग्रेजी शासन के खिलाफ आवाज बुलंद करने वाले जनजातीय समाज पर हुई गोलीबारी की बलिदान गाथा को अब राष्ट्रीय पहचान दिलाने की मांग उठी है। भीलवाड़ा में जुटे अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम के केंद्रीय कार्यकारी मंडल ने प्रस्ताव पारित कर मानगढ़ धाम को अविलंब राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने की मांग केंद्र सरकार से की है। आश्रम ने मानगढ़ के ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण-विकास तथा पाठ्य-पुस्तकों में इसके इतिहास को उचित स्थान देने की भी मांग की। रामेश्वरम भवन में चल रही केंद्रीय कार्यकारी मंडल की बैठक के बाद आयोजित पत्रकार वार्ता में आश्रम के राष्ट्रीय अध्यक्ष सत्येंद्र सिंह ने प्रस्ताव की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि 17 नवंबर 1913 को संत गोविंद गुरु के नेतृत्व में चल रहे भगत आंदोलन को दबाने के लिए अंग्रेजी शासन ने मानगढ़ धाम में गोलीकांड किया था, जिसमें 1500 से अधिक जनजातीय महिला, पुरुष और बच्चे मारे गए। यह घटना जलियांवाला बाग हत्याकांड से छह वर्ष पहले हुई थी और जनजातीय समाज के बलिदान का महत्वपूर्ण अध्याय है। उन्होंने कहा कि गोविंद गुरु के नेतृत्व में भगत आंदोलन ने अंग्रेजी शासन के दमनकारी कानूनों के खिलाफ जनजागरण के साथ जनजातीय समाज की संस्कृति, आस्था और जीवन-मूल्यों को भी मजबूत किया। मानगढ़ की घटना के बाद राजस्थान, गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के जनजातीय क्षेत्रों में अंग्रेजी शासन के खिलाफ संघर्ष की चेतना और व्यापक हुई। आश्रम के प्रस्ताव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 1 नवंबर 2022 को मानगढ़ धाम पहुंचकर बलिदानी जनजातीय समाज को श्रद्धांजलि देने तथा राष्ट्रपति के 4 अक्टूबर 2024 को मानगढ़ पहुंचकर बलिदानियों को नमन करने का उल्लेख किया गया। राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग द्वारा भी मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय धरोहर के रूप में मान्यता देने की सिफारिश किए जाने की बात कही गई। कल्याण आश्रम ने केंद्र सरकार से मानगढ़ धाम को राष्ट्रीय स्मारक घोषित करने के साथ उसके इतिहास और सांस्कृतिक महत्व के अनुरूप संरक्षण एवं विकास सुनिश्चित करने की मांग की। राजस्थान, गुजरात और मध्यप्रदेश सरकारों से स्कूल-कॉलेजों की पाठ्य-पुस्तकों में मानगढ़ के इतिहास को उचित स्थान देने का आग्रह भी किया गया। सामाजिक-धार्मिक नेताओं और जनप्रतिनिधियों से सभी मतभेदों से ऊपर उठकर इस दिशा में सामूहिक प्रयास करने की अपील की गई। पत्रकार वार्ता में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तेची गुबिन, संयुक्त महामंत्री विष्णुकांत, राजस्थान वनवासी कल्याण परिषद अध्यक्ष डॉ. थावरचंद डामोर, प्रचार प्रमुख प्रमोद पेठकर तथा बैठक के मीडिया एवं प्रचार-प्रसार संयोजक कैलाश सोनी मौजूद रहे। पत्रकार वार्ता से पूर्व अखिल भारतीय वनवासी कल्याण आश्रम की प्रांत कार्यकारिणी बैठक हुई। आश्रम की केंद्रीय कार्यकारी मंडल बैठक 30 सितंबर से शुरू हुई। इसके बाद 2 और 3 अक्टूबर को भीलवाड़ा के रामेश्वर भवन में देशभर के प्रांत पदाधिकारियों की व्यापक बैठक आयोजित की जा रही है, जिसमें 350 से अधिक पदाधिकारियों के शामिल होने की जानकारी दी गई। अखिल भारतीय वनवासी कार्यकर्ता सम्मेलन का उद्घाटन मुख्य अतिथि जगद्गुरु निम्बार्काचार्य पीठाधीष्वर श्रीजी महाराज ने सुबह 9.15 बजे दीप प्रज्ज्वलित कर किया। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने 14 वर्ष के वनवास में वनवासियों के कल्याण का कार्य किया, उसी प्रकार वनवासी कल्याण आश्रम वनवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने का कार्य कर रहा है। राष्ट्रीय महामंत्री योगेश बापट ने वनवासी समाज के कल्याण के लिए आश्रम की ओर से किए जा रहे कार्यों की जानकारी दी। बैठक की तैयारियों में रामप्रकाश अग्रवाल, ज्ञानचंद जैन, दुर्गालाल सोनी, नरेश ओझा, महावीर सोनी, अनीता काबरा, गणेश काबरा, कैलाश नंदावत, दिवाकर जावा, गुणमाला अग्रवाल, महेश खंडेलवाल, कन्हैयालाल मूंदड़ा, यश श्रीवास्तव, कमल गोखरू, तरुणा शर्मा, ओमप्रकाश अग्रवाल, भागचंद बाहेती, पदम जैन, दीपक पुरोहित, सर्वेश्वर कल्या सहित कार्यकर्ता जुटे रहे।

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